चना फांकना हो सकता है जानलेवा, मेरठ में सामने आया एक चौकाने वाला मामला..!

मेरठ में डॉक्‍टर्स के सामने एक अनोखा विषय सामने आया है।


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क्या आप भरोसा करेंगे कि चना या फिर मुरमुरा फांकना भी किसी के लिए जानलेवा हो सकता है या फिर सोते-सोते किसी बुजुर्ग के दांत क्या फेफड़े में जाकर फंस सकता है. आप कहेंगे बिलकुल नहीं, किन्तु जनाब ऐसा हो सकता है. मेरठ में डॉक्टरों की टीम ने एक ऐसा ऑपरेशन करने में सफलता हासिल की है, जहां चना व मुरमुरा फांकने के दौरान एक कंकड़ लंग्स में जाकर फंस गया और मरीज़ की जान पर बन आई। मरीज को पता ही नहीं चला कि उसे क्या हो गया और एकाएक उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी. इसके बाद मरीज़ को लेकर घरवाले बहुत डॉक्टर्स के पास गए, किन्तु उसकी दिक्कत बढ़ती ही जा रही थी। ऐसे में मेरठ के एक डॉक्टर ने यूनिक ऑपरेशन के ज़रिए इस पार्टिकल को निकालने में सफलता हासिल की है।

ये है विषय


आमतौर पर हम कभी कैप्सूल, दवा या फिर चना, मुरमुरा आदि फांककर खा लेते हैं, किन्तु मेरठ में एक छप्पन साल की महिला ने मुरमुरा फांककर क्या खाया उनकी जान पर बना आई। इस स्त्री को पता ही नहीं चला और चंद मिनटों में मुरमुरे के ज़रिए उसके फेफड़े में एक कंकड़ चला गया. इसके बाद महिला को सांस लेने में दिक्कत शुरु हो गई तो घरवाले महिला को लेकर बहुत दिन बहुत डॉक्टरों के पास दौड़े, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। सच कहा जाए तो कोई डॉक्टर फेफड़े में फंसे इस पत्थर को डायग्नोज़ नहीं कर पा रहा था। ऐसे में मेरठ के चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर वीरोत्तम तोमर ने अऩोखी रिजिड ब्रोनोस्कोपी के जरिए फेफड़े से इस कंकड़ को निकालने में सफलता प्राप्त की है, जो कि अपनी तरह का रेयर ऑफ रेयर केस था।

ऐसे मिली कामयाबी


वर्चुअल ब्रोंकोस्कोपी से डॉक्टर तोमर ने बाएं फेफड़े में फंसे करीब एक सेंटीमीटर मोटे कंकड़ को बिना ऑपरेशन निकाल लिया। सांस रोग विशेषज्ञ डा. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि किला-परीक्षितगढ़ की छप्पन साल की मुनेश देवी को सांस लेने में दिक्कत थी। एक्सरे व सीटी में नॉर्मल मिला तो स्टेथोस्कोप से जांच की तो पता चला कि छाती में बायीं ओर एयर एंट्री नहीं थी। वर्चुअल ब्रोंकोस्कोपी से पता चला कि बाहरी पदार्थ नली में फंसा है. इसके बाद डॉ. वीरोत्तम तोमर, ईएनटी सर्जन डॉ. रोहित सिंह, डॉ. राजीव सिंह और डॉ. अतनु मुखर्जी की टीम ने बिना चीरफाड़ किए बगैर बायीं ओर के फेफड़े से कंकड़ को निकाल लिया। अब मरीज मुनेश देवी स्वस्थ हैं।

डॉक्‍टर्स ने कोई भी चीज फांककर ना खाने की सुझाव दी है।

डॉक्‍टर ने बताई अनोखी बात


यही नहीं, डॉक्टर वीरोत्तम तोमर को कहना है कि एक बार तो एक मरीज़ ऐसा आया जिसके दांत का सेट सोते सोते खर्राटे के साथ फेफड़ो में जाकर फंस गया. इस मरीज़ को भी रिजिड ब्रोंकोस्कोपी के ज़रिए उन्होंने सॉल्व किया था। दांत का सेट ब्रोंकोस्कोपी तकनीक से बाहर निकाला था।

तोमर ने सुझाव दी कि कभी भी कोई भी चीज़ फांककर न खाएं क्योंकि फांककर खाने के वक़्त ऐसा हो सकता है कि सांस की नली में वो जाकर फंस जाए और फिर जान के लाले पड़ जाएं। चने या कोई भी ठोस खाद्य पदार्थ सीधे मुंह में फांकने से बचना चाहिए। ये हमारी श्वांस नली में फंसकर सड़ने लगते हैं, जो जानलेवा है।