पाकिस्तान की संसद में प्रतिबंध हुए 'सिलेक्टेड प्रधानमंत्री इमरान'..!

पाकिस्तान की संसद में इन दिनों एक फ्रेज 'सिलेक्टेड प्रधानमंत्री' पर हंगामा मचा हुआ है. विपक्षी दल इसका प्रयोग इमरान खान को संबोधित करने के लिए कर रहे थे. संदेश साफ था- पिछले साल इमरान खान की जीत में देश की ताकतवर सेना का हाथ बताया गया था.

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पाकिस्तान की नैशनल एसेंबली में बहस के दौरान तकरीबन एक साल तक इमरान खान के लिए 'सिलेक्टड' शब्द का इस्तेमाल जारी रहने के बाद अब नैशनल एसेंबली के डेप्युटी स्पीकर कासिम खान सूरी ने इस पर आपत्ति जताई. उन्होंने बताया कि यह पाकिस्तान के पीएम इमरान खान का अपमान है और उन्होंने सासंदों के 'सिलेक्टेड' शब्द बोलने पर प्रतिबंध लगा दिया.
उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, "यह निर्वाचित प्रतिनिधियों का सदन है. अब से कोई भी इस शब्द का प्रयोग नहीं करेगा."डेप्युटी स्पीकर का यह आदेश ऊर्जा मंत्री उमर अयूब खान के ऐतराज के बाद आया. मंत्री ने कहा कि सदन के नेता को सिलेक्टेड कहना पूरे सदन का अपमान है. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से निर्वाचित हुए प्रधानमंत्री के लिए चयनित शब्द का प्रयोग करना पूरी व्यवस्था का अपमान है.

विपक्षी सांसद मरियम औरंगजेब को जब सोमवार को सिलेक्डेड शब्द के प्रयोग करने से रोका गया तो उन्होंने एक नया शब्द चुन लिया और इमरान खान को 'हैंडपिक्ड' करार दिया. पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने सोमवार को कहा, आपने प्रधानमंत्री के अहं की कारण से इस शब्द के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया. यह कैसी आजादी है कि नैशनल एसेंबली के सदस्य सदन पर अपनी बात भी नहीं कह सकते हैं.
पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने ही सबसे पहले प्रधानमंत्री इमरान खान को चुनाव के बाद एसेंबली में बधाई देते वक्त 'सिलेक्टेड प्राइम मिनिस्टर' कहकर बुलाया था. शुरुआत में इमरान खान की पार्टी की ओर से इसे बहुत गंभीरता से नहीं लिया गया. यह परंपरा संसद में और कई प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी जारी रही किन्तु रविवार को सांसदों को इमरान खान को सिलेक्टेड यानी चयनित बुलाए जाने से रोक दिया गया.

ऐसा कहा जाता है कि इमरान खान ने चुनाव में इसलिए जीत दर्ज कर पाए क्योंकि वह ताकतवर पाकिस्तानी सेना के पसंदीदा प्रत्याशी थे. विपक्षी दल ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव में इमरान खान को जिताने के लिए धांधली हुई. नवाज शरीफ की पार्टी के कई नेताओं ने यह भी आरोप लगाया था कि उन पर इमरान खान की पार्टी में शामिल होने के लिए दबाव बनाया गया.
पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष इमरान खान ने पिछले साल 2018 में 272 सीटों में से 123 पर जीत दर्ज करते हुए चुनाव जीता था.पीएम इमरान खान ने चुनाव जीतने के बाद आर्मी द्वारा चुने गए आरोप पर कहा था, मैं किसी तानाशाह के कंधों पर नहीं चढ़ा, मैं 22 सालों तक मेहनत करने के बाद यहां पहुंचा हूं.

पाकिस्तान में लोकप्रिय सेना राजनीति में हस्तक्षेप से लगातार मना करती रही है. दूसरी ओर  प्रधानमंत्री के समर्थक दावा करते हैं कि उनकी पार्टी ने अपने बलबूते ही चुनाव जीता है.पीटीआई सांसद अलिया हमजा मलिक ने एक इंटरव्यू में कहा कि खान के लिए चयनित शब्द का प्रयोग अनुचित और अन्यायपूर्ण है. पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी का वोटबैंक 2013 के आम चुनाव से पिछले साल के चुनाव तक 7.6 मिलियन बढ़ा है. इस अभिव्यक्ति का प्रयोग करके विपक्ष ना सिर्फ संसद की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े कर रहा है बल्कि पाकिस्तान की जनता पर भी सवालिया निशान लगा रहा है.