बाबा ने लिया समधि, रक्षामंत्री राजनाथ सहित कई बड़े नेताओं ने किए अंतिम विवाई

पद्मभूषण स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि की शरीर को उनके निवास स्थान राघव कुटीर में भू समाधि दी गई। इस दौरान उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए संत समाज सहित,उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्या,सीएम योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत,उत्तराखंड के विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल, मदन कौशिक,अजय भट्ट, योग गुरू स्वामी रामदेव भी पहुंचे।
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भारत माता मंदिर के संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज को भू-समाधि दे दी गई है। वहां उपस्थित रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, साध्वी निरंजन ज्योति, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत कई नेताओं ने उन्हें अंतिम विवाई किया।
स्वामी सत्यामित्रानंद को श्रद्धांजलि देने के लिए सुबह से ही तांता लगा रहा। 
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, योगगुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण सहित कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि सभा के खत्म होने के बाद स्वामी सत्यमित्रानंद की अंतिम यात्रा आश्रम परिसर में ही निकाली गई। बैंड बाजों के साथ निकाली गई अंतिम यात्रा के बाद उनके पार्थिव शरीर को समाधि स्थल में स्थापित किया गया। यहां विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के साथ उन्हें भू समाधि दी गई।
आपको बता दें कि भारत माता मंदिर के संस्थापक पद्मभूषण महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज 87 साल में मंगलवार सुबह अपने निवास राघव कुटीर में ब्रह्मलीन हुए। वह पिछले एक पखवाड़े से गंभीर रूप से बीमार थे और देहरादून के मैक्स अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था।

स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी का जन्म 19 सिंतबर, 1932 को आगरा में हुआ था। किन्तु स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि का परिवार उत्तर प्रदेश के सीतापुर का रहने वाला था। बचपन से ही स्वामी जी की रुचि संन्यास और अध्यात्म में थी। जिसकी कारण से उन्होंने अपना सांसारिक जीवन बहुत कम उम्र में त्याग दिया था। सांसारिक जीवन से संन्यास लेने से पूर्व लोग उऩ्हें अंबिका प्रसाद पांडेय के नाम से पहचानते थे। स्वामी सत्यमित्रानंद 
गिरि जी के पिता का नाम शिवशंकर पांडेय था। उनके पिता को राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका था। स्वामी जी जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि के गुरु थे.स्वामी सत्यमित्रानंद को 29 अप्रैल, 1960 को केवल 26 साल की आयु में भानपुरा पीठ का शंकराचार्य बना दिया गया था। किन्तु करीब 9 साल तक धर्म और मानव सेवा करने के बाद उन्होंने साल 1969 में खुद शंकराचार्य के पद को त्याग दिया था।

स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने हरिद्वार में वर्ष 1983 में भारत माता मंदिर की स्थापना की थी। वो अपने जीवनकाल में 65 से ज़्यादा देशों की यात्रा कर चुके थे। आध्यात्म चेतना के धनी स्वामी जी को वर्ष 2015 में पद्मभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।