2019 के बाद 2022 जीतने के लिये BJP का यूपी योजना, इस जाति को सीधे साधने में लगी..!

लोकसभा चुनाव में भाजपा के जबरदस्त प्रदर्शन के बाद पूरी तरह से बिखर चुका विपक्ष जहां एक ओर हार के सदमे से उबरने की प्रयास कर रहा है वहीं भाजपा 2022 के विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाने में अभी से लग गयी है। बीजेपी को जिस तरह से पिछड़े वर्ग से भारी समर्थन मिला है उससे पार्टी उत्साहित है और एक बार फिर से ओबीसी को साधने के लिए इस वर्ग के नेताओं को खास तरजीह दे कर उनका कद बढ़ाने में लगी है। 
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कुर्मी वोटरों पर भाजपा की खास नजर है। पार्टी अब तक प्रदेश में कुर्मी समाज के वोटों के लिए सहयोगी दल अपना दल(एस) और उसकी नेता अनुप्रिया पटेल पर बहुत  हद तक निर्भर थी। अब धीरे-धीरे ही सही पार्टी इस समाज के मतों को सीधे अपने पाले में लाने की कवायद शुरू हो गयी है। इस जाति के नेताओं के दम पर आने वाले समय में बीजेपी विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर करने का मन बना रही है।
भाजपा की इस कवायद का प्रभाव कुर्मियों के गढ़ कहे जाने वाले मिर्जापुर में दिख सकता है। कुर्मी समाज की राजनीति की धुरी बन चुके मिर्जापुर से ही अनुप्रिया पटेल दोबारा सांसद चुनकर आयी हैं। भाजपा से जुड़े कुर्मी समाज के तीन बड़े नेता मिर्जापुर से ही आते हैं। सहयोगी दल की नेता यहां से सांसद हैं तो भाजपा के पिछड़े वर्ग के बड़े नेताओं में शामिल योगी सरकार में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह इसी जिले के जमालपुर इलाके के रहने वाले है। वहीं रमाशंकर पटेल जिनका दल में कद तेजी के साथ बढ़ रहा है, वह मिर्जापुर के मड़िहान विधानसभा से विधायक हैं।
ओम प्रकाश राजभर प्रकरण से सबक सीख चुकी भाजपा में कयास लगाया जा रहा है आने वाले समय में जिले के दोनों नेताओं को कुर्मी समाज को सीधे पार्टी से जोड़ने के लिये जिम्मेदारी दी जा सकती है। हाल ही में लखनऊ में आयोजित पार्टी के पिछड़ा वर्ग मोर्चा सम्मेलन में रामशंकर पटेल को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के हाथों सम्मानित कर इसके इशारा भी दे दिए गए हैं।
जिस तरह से लोकसभा चुनाव में कुर्मी समाज ने भाजपा को जबरजस्त समर्थन दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार इसको देखते हुए विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा किसी सहारे के बगैर इस बड़े वर्ग से सीधे जुड़ना चाहती है। बताते चलें की कभी मिर्जापुर के चुनार के रहने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश सिंह पार्टी में पूरे प्रदेश में कुर्मी समाज व पिछड़े वर्ग के बड़े नेता हुआ करते थे। भाजपा और अपना दल के मध्य 2014 मे गठबंधन होने के जैसे-जैसे अनुप्रिया पटेल का कद बढ़ता चला किया वह साइड लाइन होते चले गए।