त्रिकोणीय मुकाबले में उलझी बस्ती मंडल की संतकबीरनगर, बस्ती और डुमरियागंज सीट…!

आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र जब बस्ती आए तो उन्होंने कुछ ऐसे ही शब्द गढ़े थे। कई दशक पहले की बात और आज की बस्ती की स्थिति में कोई खासा परिवर्तन नहीं आया। आचार्य रामचंद्र शुक्ला की जन्मभूमि को अब भी विकास की दरकार है। शहर में आते ही आपका साक्षात्कार सडक़ के बीचोबीच खड़े वाहनों, पंडित जवाहर लाल नेहरू की घोड़े पर बैठी प्रतिमा और मुख्य बाजार की मुख्य सडक़ पर अवैध कब्जा कर बनी पुलिस चौकी से होता है। ठेठ गन्ना बेल्ट और बाढ़ प्रभावित बस्ती मंडल की बात इसलिए भी कि यहां की तीन लोकसभा सीट संतकबीरनगर, बस्ती और डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) कांटे के मुकाबले में उलझ हुई हैं।

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गन्ना किसान सही दाम और पर्ची नहीं मिलने से नाराज हैं तो बाढ़ प्रभावित इलाका पुराने दंश को नहीं भूल पा रहा। शहर में नवीन मंडी के सामने चाय की दुकान चलाने वाले सैफू कहते हैं कि हम विकास की दौड़ में कम से कम 35 वर्ष पीछे हैं, पहले तो थोड़े बहुत काम भी हुए, लेकिन अब वह पूरी तरह ठप है। वहीं फर्स्ट टाइम वोटर और कपड़ा व्यवसायी आदर्श गुप्ता कहते हैं कि वोट मोदी के चेहरे पर ही जाएगा। इसके समर्थन में आदर्श ने बहुत सारी बाते बताईं। यदि राजनीतिक दलों की बात करें तो योगी के प्रभाव क्षेत्र में यह तीनों सीटें आती हैं। कांग्रेस ने यहां मजबूत लड़ाई देख प्रियंका गांधी से तीनों सीटों पर प्रचार के आखिरी दिन सभा करा दी, ताकि वोटर को प्रभावित किया जा सके। गठबंधन और भाजपा पहले ही रैली कर चुकी हैं।

बस्ती: राजकिशोर के लडऩे से गठबंधन और भाजपा परेशान

पूर्वांचल की हॉट सीटों में शुमार बस्ती सीट पर मतदाता अभी तक तय नहीं कर पाए कि जाएं तो जाएं कहां। त्रिकोणीय मुकाबले में यह सीट फंसी हुई है। गठबंधन के तहत यह सीट बसपा के खाते में गई। बसपा ने यहां पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री रामप्रसाद चौधरी को मैदान में उतारा है। इससे नाराज होकर यूपी सरकार के पूर्व मंत्री व सपा नेता बाहुबली राजकिशोर सिंह कांग्रेस में चले गए और पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी बना दिया। भाजपा ने यहां 2014 में जीत हासिल करने वाले हरीश द्विवेदी को मैदान में उतारा है। राजकिशोर के उतरने से यह सीट अधिक चर्चा में आ गई। साथ ही मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। लोगों में चर्चा है कि जितना राजकिशोर चढ़ेंगे उतना हानि भाजपा को होगा, जबकि उनके कमजोर होने से भाजपा के लिए राह आसान होगी। 2014 चुनावों की बात करें तो भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हरीश द्विवेदी ने बहुत ही कम 33562 वोटों से चुनाव जीता था। सपा ने तब कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह के भाई बृजकिशोर सिंह डिंपल और बसपा ने पूर्व सांसद रामप्रसाद चौधरी को मैदान में उतारा था।

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हरीश को 357680, बृजकिशोर को 324198 व रामप्रसाद को 286747 मत मिले थे। 2017 चुनावों में भाजपा ने यहां पांचों विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। मुद्दों की बात करें तो गन्ना, खराब सडक़ें और विश्वविद्यालय यहां प्रमुख मुद्दा है। वाल्टरगंज चीनी मिल पूरी तरह बंद है, जबकि मुंडेरवा मिल को कुछ दिन पहले योगी सरकार ने नई मशीनों के साथ चालू कराया। वाल्टरगंज पर ४९ करोड़ रुपए बकाया है।संतकबीरनग. जूताकांड से चर्चा में आई थी सीट, अब भाजपा ने गोरखपुर सपा सांसद को थमाया टिकट यूपी की राजनीति में बाहुबल की मुख्य भूमिका रहती है। संतकबीरनगर जूताकांड से चर्चा में आई थी। भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी ने भाजपा विधायक को ही भरी बैठक जूतों से पीट दिया। हालांकि भाजपा ने इसबार शरद त्रिपाठी का टिकट काट दिया, जिससे ब्राह्मण बाहुल्य इलाका नाराज दिख रहा है।

उनके स्थान पर सपा से आए और उपचुनाव में गोरखपुर सीट जीतने वाले प्रवीण निषाद को टिकट दिया गया है। गठबंधन के तहत बसपा ने कुशल तिवारी को टिकट दिया है, जो बाहुबली हरिशंकर तिवारी के बेटे हैं। वहीं कांग्रेस ने सपा के बाहुबली नेता पूर्व सांसद भालचंद यादव को मैदान में उतारा है। ऐसे में यहां तीनों के बीच बेहद करीबी लड़ाई दिख रही है। मुद्दों की बात करें तो यह इलाका भी बाढ़ प्रभावित है। साथ ही शरद त्रिपाठी का टिकट कटने से एक बड़ा तबका खासा नाराज दिख रहा है। मुद्दों की अगर बात करें तो क्षेत्र की एक मात्र चीनी मिल बंद हो चुकी है और किसानों को दूसरे जिलों की चीनी मिलों पर निर्भर रहना पड़ता है। 2014 चुनाव में शरद त्रिपाठी ने 97978 मतों से चुनाव जीता था। उन्हें 348892 मत मिले थे, जबकि बसपा के कुशल तिवारी को 250914 और सपा के भालचंद यादव को 240169 मत मिले थे। सीट त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी हुई है।

डुमरियागंज: जगदम्बिका पाल फंसे त्रिकोणीय लड़ाई में

यूपी में एक दिन का मुख्यमंत्री बनकर देश में सियासी भूचाल लाने वाले जगदम्बिका पाल डुमरियागंज लोकसभा सीट पर इस बार फंसे नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में लोग साफ कहते हैं कि पाल कभी गलत दाव नहीं चलते, लेकिन इस बार कांग्रेस ने यहां से ब्राह्मण चेहरा डॉ. चंद्रेश उपाध्याय उपाध्याय को टिकट देकर समीकरण प्रभावित कर दिए हैं। बसपा ने आफताब आलम को मैदान में उतारा है। ऐसे में यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प है। मतदाताओं ने भी मौन साध रखा है। दरअसल, डुमरियागंज सीट सिद्धार्थनगर जिले में है। जिले का 60 प्रतिशत से अधिक भाग बाढ़ प्रभावित है। आधा दर्जन से अधिक नदियां मानसून के साथ ही कहर बरपाना शुरू कर देती हैं। इसलिए यह चुनाव में बड़ा मुद्दा है। साथ ही स्वास्थ्य के लिए लोगों की निर्भरता गोरखपुर और लखनऊ पर अधिक है। अगर पिछले चुनाव की बात करें तो कांग्रेस से भाजपा में आए जगदम्बिका पाल ने 103577 मतों से चुनाव जीता था। उन्हें 298845 मत मिले थे, जबकि बसपा प्रत्याशी मोहम्मद मुकीम को 195257 मत और सपा प्रत्याशी व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय को 174778 मत। अब देखना यहां मज़ेदार होगा कि मतदाता किधर रुख करते हैं।

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