टाइम मैगजीन के कवर पेज को लेकर इस अभिनेत्री रिचा चड्ढा ने कसा पीएम मोदी पर तंज कसते, कही बड़ी बात…!

लोकसभा चुनाव के लिए 5 चरणों का मतदान हो चुका है। दो चरण और होने हैं उसके बाद 23 मई को नतीजे आ जाएंगे। ऐसे में जाहिर है कि सियासत गरम होगी। इसी गरमाहट के मध्य एक नया विवाद सामने आया है। आमरीका की प्रसिद्ध टाइम मैगजीन ने पीएम मोदी को लेकर विवादित कवर पेज जारी किया है। मैगजीन ने पीएम मोदी को भारत में समाज को बांटने वाला (India’s Divider in Chief) बताया है। वहीं अब इस मामले को लेकर बॉलीवुड एक्ट्रेस रिचा चड्ढा ने कमेंट किया है। सोशल प्‍लेटफॉर्म पर एक्टिव रहने वाली अभिनेत्री रिचा चड्ढा ने इस कवर फोटो पर लिखे गए टाइटल की जमकर प्रशंसा की है। जब आप देश से बाहर की प्रेस और मीडिया को खरीदने की शक्ति नहीं रखते

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उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल पर पीएम मोदी और भारतीय मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा है कि ‘जब आप देश से बाहर की प्रेस और मीडिया को खरीदने की ताकत नहीं रखते हैं तो ऐसा ही होता है।’ रिचा चड्ढाके इस ट्वीट को फेमस फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने रीट्वीट किया है।पत्रिका ने नेहरू के समाजवाद और भारत की मौजूदा सामाजिक परिस्थिति की तुलना की है

टाइम पत्रिका के एशिया एडिशन ने लोकसभा चुनाव 2019 और पिछले पांच सालों में नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज पर लीड स्टोरी की है। प्रधानमंत्री के कामकाज पर सख्त आलोचनात्मक टिप्पणी करते हुए पत्रिका ने नेहरू के समाजवाद और भारत की मौजूदा सामाजिक परिस्थिति की तुलना की है। इस आलेख में कहा गया है कि नरेंद्र मोदी ने हिन्दू और मुसलमानों के मध्य भाईचारे की भावना को बढ़ाने के लिए कोई इच्छा नहीं जताई।आतिश तासीर ने लिखा है आर्टिकल, तवलीन सिंह के बेटे हैं वो

आपको बता दें कि इस आर्टिकल को आतिश तासीर ने लिखा है जोकि भारतीय पत्रकार तवलीन सिंह और पाकिस्तानी राजनेता और बिजनेसमैन सलमान तासीर के बेटे हैं। उनका जन्म 1980 में ब्रिटेन में हुआ था। कई लोगों ने इस आर्टिकल को यूं भी तवज्जो देना आवश्यक नहीं समझा क्योंकि इसे एक पाकिस्तानी राजनेता के बेटे ने लिखा है किन्तु इस बात के जवाब में लोगों ने ये भी कहा कि आतिश की मां तवलीन सिंह बीजेपी की घोर समर्थक हैं। हालांकि आतिश अपने माता पिता की पहचान से इतर एक अलग पहचान बना चुके हैं। उनकी पहली किताब स्ट्रेंजर टू हिस्ट्री को 14 से अधिक भाषाओं में ट्रांसलेट किया गया है और इसे मुस्लिम समाज को समझने के लिए एक बेहतरीन जरिया माना जाता है। इसके अलावा उनके उपन्यास टेंपल गोअर्स को 2010 के कोस्टा फर्स्ट नॉवल अवॉर्ड के लिए शॉर्ट लिस्ट किया गया है। उन्होंने वर्ष 2008 में मंटो की कहानियों को भी ट्रांसलेट किया था। वर्ष 2011 में अपने पिता की हत्या होने पर उन्होंने पाकिस्तान के स्थितियों पर भी एक आर्टिकल लिखा था।

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